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भारतीय राष्‍ट्रीय ग्रंथसूची  

  अभिमत | अंतराल | आधुनिकरण   | पुन: रुपान्‍तर   

 

 

भारतीय राष्‍ट्रीय ग्रंथसूची को मौजुद भारतीय प्रकाशनों में से एक प्रमाणिक ग्रंथसूची माना जाता है । इस ग्रंथसूची में आसामी, बंगला, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्‍नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्‍कृत, तमील, तेलगू और उर्दू भाषाओं के उन पुस्‍तकों को समाहीत किया गया है जो राष्‍ट्रीय पुस्‍तकालय, कोलकाता, डिलवरी ऑफ बुक्‍स और न्‍यूजपेपर्स (पब्‍लिक लाइब्रेरीज) एक्‍ट 1954 (1954 का 27 जो संशोधित रूप है 1956 का 99) के तहत प्राप्‍त हुई हैं ।

निम्‍नलिखित प्रकाशनों को अलग रखा गया है ।

  • मानचित्र
  • संगीत गणना
  • पत्रिका और समाचार पत्र
  • टेक्‍सबुक की कुंजी
  • क्षणिक और अन्‍य कुछ सामग्री

मुख्‍य इंट्री को रोमन लिपि में और संग्रह एवं टिप्‍पणी अगर कोई हो तो अंग्रेजी में लिखी गई है । वर्गीकृत हिस्‍सा का वर्गीकरण डेवी डेशिमल विधि से बनाया गया है किंतु सभी इंट्री के दॉंये नीचे हिस्‍से में कॉलन क्‍लाशिफिकेशन का इस्‍तेमाल किया गया है ।
शुरू में विविध भाषाओं के देश में संकलन के समय में डॉ सुनीति कुमार चटर्जी ने रोमनलिपि में ड्राइट्रिकल चिन्‍ह का उपयोग करने का सुझाव दिया जिससे भाषाओं की समस्‍या को दूर किया जाए । जब भारतीय भाषाओं की लिपि के लिए एक प्रमाणिक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जा रहा था उस समय लिप्‍यन्‍तरण टेबुल का प्रमाणिकता काफी उपयोगी था । वर्तमान में सी-डेक जिस्‍ट सॉफ्टवेयर से भाषा के डाटा को इंटर करना संभव हो पाया और आज भाषा की डाटा को इंट्री करने में व्‍यवहार किया जाता है ।
क्रमिक प्रकाशन शुरू होने के पूर्व दो प्रायोगिक फासकीकूलस देश और विदेश के विशेषज्ञों के विचार और सुझाव के लिए जारी किए गए, जिसमें से एक डेवी डेशिमल क्‍लाशीफिकेशन और दूसरा कॉलन क्‍लाशीफिकेशन पर आधारित था । 15 साल के कड़ी मेहनत के बाद 15 अगस्‍त 1958 को वर्ष 1957 के सभी तिमाही खंड को समायोजित कर एक वार्षिक खंड प्रकाशित किया गया । इस खंड को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने जारी किया ।

 

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